भावी इंटरनैट की परिभाषा...

सार्वत्रिक इंटरनैट

क्षेत्रीय भाषा में वैब विषय वस्तु चैलैंजरस साफ्टवेयर टैक्नोलोजीस चण्डीगढ इस साइट को इंटरनैट पर भारतीय भाषाओं की उन्नति के लिऐ समर्पित करता है

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सूचना संचार यन्त्र एवं इंटरनैट टैक्नोलोजी

कम्प्यूटर एवं संचार यन्त्रों की हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका है समाज के पूर्ण विकास के लिऐ सूचना एवं संचार यन्त्र टैक्नोलोजी में लगातार विस्तार हो रहा है। इंटरनैट टैक्नोलोजी द्वारा मानवता के लाभ के लिऐ प्रत्येक विषय पर सूचना बाँटने का रास्ता खुल गया है। इस टैक्नोलोजी का सदुपयोग सही मायने में विकसित देश ही उठा रहे हैं।

जन-साधारण राजकीय आर्थिक सहायता योजना, स्वास्थ्य, सफाई, रोजगार, अनाज की कीमत, शिक्षा एवं खेतीबाड़ी के लिए बीज, उर्वरक और कीड़ेमार दवाओं के मूल्यों एवं उपलब्धि के बारे में जानकारी लेने के लिए उत्सुक हैं।

इंटरनैट के इस्तेमाल से:-

इंटरनैट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में वृद्घि करने के लिए जन-साधारण को उत्साहित करना चाहिए

केन्द्र सरकार ने इलैक्ट्रोनिक उधत्ता का वेग बढाने के लिए और इंटरनैट इस्तेमालकर्ता  को शिक्षित करने हेतु कई कदम उठाए हैं ताकि जन-साधारण कम्प्यूटर एवं संचार सुविधाओं का इस्तेमाल करने में हिचकिचाहट को छोडे व इंटरनैट का इस्तेमाल करना आरम्भ करे।

परन्तु ...

सूचना टैक्नोलोजी व इंटरनैट का माध्यम अंग्रेजी होने के कारण आम जनता का विभाजन दो हिस्सों में हो गया है

    वो जो इंटरनैट पर उपलब्ध सूचना का इस्तेमाल करने योग्य हैं और

    वो जो इंटरनैट पर उपलब्ध सूचना का इस्तेमाल करने में अयोग्य हैं।

 

इस समय विश्व-भर मे 6000 से अधिक भाषाएँ प्रचलित हैं इंटरनैट पर इस में से 98 प्रतिशत वैब-पृष्ठों पर सूचना 12 भाषाओं में उपलब्ध है जिस में 72 प्रतिशत वैब-पृष्ठ अंग्रेजी भाषा में ही हैं। ग़ौर करने वाली बात यह है कि विश्व-भर में प्रचलित भाषाओं के होते हुऐ अति-खण्डित इंटरनैट से परहेज किया जाऐ या फिर इसे सर्वात्रिक इंटरनैट बनाने के लिऐ योग्य कदम उठाए जाएँ।

मात्र 3 प्रतिशत भारतीय अंग्रेजी भाषा बोल-समझ पाते हैं जबकि 40 प्रतिशत हिन्दी बोल-समझ सकते हैं।

बावजूद इसके उच्च शिक्षा, न्याय व्यवस्था, अधिकारी वर्ग और संस्थाओं में सूचना संचार का माध्यम अंग्रेजी है।